Section A
Q1. निम्नलिखित की सप्रसंग व्याख्या लगभग 150 शब्दों में कीजिए:
(a)
जग हठवाड़ा स्वाद ठग, माया बेसाँ लाई।
रामचरन नीका गही, जिनि जाइ जनम ठगाइ।।
कबीर माया मोहनी, जैसी मीठी खाँड़।
सतगुरु कृपा भई, नहीं तो करती भाँड़।।
(b)
नटनंदन मोहन सों मधुकर! है काहे की प्रीत?
जौ कीजै तो है जल, रवि औ जलधर की सी रीति।।
जैसे मीन, कमल, चातक को ऐसे ही गई बीति।
तलफत, जरत, पुकारत सुनु, सठ। नाहिं न है यह रीति।।
(c)
बातन्ह मनहि रिझाई सठ जनि घालसि कुल सीख।
राम बिरोध न उबरसि सरन बिष्नु अज ईस॥
की तजि मान अनुज इव प्रभु पद पंकज भृंग।
होहि कि राम सरानल खल कुल सहित पतंग।।
(d)
बुद्धि के पवमान में उड़ता हुआ असहाय जा रहा तू किस दिशा की ओर को निरुपाय?
लक्ष्य क्या? उद्देश्य क्या? क्या अर्थ?
यह नहीं यदि ज्ञात, तो विज्ञान का श्रम व्यर्थ।
(e)
तूगाः
मेरे अँधियारे अंतसू में आलोक जगा
स्मृति का
श्रुति का :
तू गा, तू गा, तू गा, तू गा