Section A
Q1. निम्नलिखित काव्यांशों की संदर्भ-सहित व्याख्या (लगभग 150 शब्दों में) प्रस्तुत करते हुए उनके काव्य-सौंदर्य का परिचय दीजिए:
(a)
श्याम मुख देखे ही परतीति ।
जो तुम कोटि जतन करि सिखवत जोग ध्यान की रीति ।।
नाहिंन कछू सयान ज्ञान में यह हम कैसे मानैं ।
कहो कहा कहिए या नभ को कैसे उर में आनैं ।।
यह मन एक, एक वह मूरति भृंगकीट सम माने ।
सूर सपथ दै बूझत ऊधौ यह ब्रज लोग सयाने ।।
(b)
कहेहु तात अस मोर प्रनामा । सब प्रकार प्रभु पूरनकामा ।।
दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी ।।
(c)
चेतना का सुंदर इतिहास अखिल मानव भावों का सत्य;
विश्व के हृदय-पटल पर दिव्य अक्षरों से अंकित हो नित्य
विधाता की कल्याणी सृष्टि सफल हो इस भूतल पर पूर्ण;
पटें सागर, बिखेरें ग्रह-पुंज और ज्वालामुखियाँ हों चूर्ण।
(d)
बालहीना माता की पुकार कभी आती, और आता आर्त्तनाद पितृहीन बाल का;
आँख पड़ती है जहाँ, हाय वहीं देखता हूँ सेंदुर पुँछा हुआ सुहागिनी के भाल का;
बाहर से भाग कक्ष में जो छिपता हूँ कभी, तो भी सुनता हूँ अट्टहास क्रूर काल का;
और सोते-जागते में चौंक उठता हूँ, मानो शोणित पुकारता हो अर्जुन के लाल का ।
(e)
शत घूर्णावर्त, तरंग भंग, उठते पहाड़
जल राशि-राशि जल पर चढ़ता खाता पछाड़
तोड़ता बंध-प्रतिसंध धरा, हो स्फीत वक्ष
दिग्विजय-अर्थ प्रतिपल समर्थ बढ़ता समक्ष ।