Q1. लातार रे एम आकान कुकली को मुदखो़न जाहाँ गे मोड़ें गोटाङ
(5) कुकली रेयाक् तेला ओलमें। (5 imes 7 = 35)
(a) संताली पारसी रेयाक् ओनोरोम ओलमें।
(b) संताली सॉवहेत् हारा बुरू रे ‘‘बेनागाड़िया मिशन’’ रेयाक् एनेम ओलमें।
(c) कुदुम दो ओका को मेताक् काना ? कुदुम मेन माड़ाङ ‘‘कुदुम रे कुडित्-कुडित्’’ चेदाक् को मेना ? ओलमें।
(d) संताली होड़ सॉवहेत् रेयाक् गुनागुणको ओलमें।
(e) लाँगड़े दो ओका जो़होक् आर चेदाक् को एनेच् आर सेरेञा ? ओलमें।
- (a) संताली पारसी रेयाक् ओनोरोम ओलमें।
- (b) संताली सॉवहेत् हारा बुरू रे ‘‘बेनागाड़िया मिशन’’ रेयाक् एनेम ओलमें।
- (c) कुदुम दो ओका को मेताक् काना ? कुदुम मेन माड़ाङ ‘‘कुदुम रे कुडित्-कुडित्’’ चेदाक् को मेना ? ओलमें।
- (d) संताली होड़ सॉवहेत् रेयाक् गुनागुणको ओलमें।
Q1. THE REAL 13 (PII) Marks अक
(a) THE REAL 13 (PII) Marks अक कुदुम दो ओका को मेताक् काना ? कुदुम मेन माड़ाङ ‘‘कुदुम रे कुडित्-कुडित्’’ चेदाक् को मेना ? ओलमें।
(b) संताली होड़ सॉवहेत् रेयाक् गुनागुणको ओलमें।
(c) लाँगड़े दो ओका जो़होक् आर चेदाक् को एनेच् आर सेरेञा ? ओलमें।
(d) पारसी रेयाक् टोठारिया रूप (क्षेत्रीय रूप) मेनते चेत् एम बुझावेदा ? पारतुल सालाक् ओलमें।
(e) संताल कोवाक् तिनाक् पारिस मेनाक्-आ ? पारिस चिनहा सालाक् ओल सोदोर में।
- (a) संताली पारसी रेयाक् ओनोरोम ओलमें।
- (b) संताली सॉवहेत् हारा बुरू रे ‘‘बेनागाड़िया मिशन’’ रेयाक् एनेम ओलमें।
- (c) कुदुम दो ओका को मेताक् काना ? कुदुम मेन माड़ाङ ‘‘कुदुम रे कुडित्-कुडित्’’ चेदाक् को मेना ? ओलमें।
- (d) संताली होड़ सॉवहेत् रेयाक् गुनागुणको ओलमें।
Q2. साधु रामचाँद मुर्मूवाक् ‘‘लिटा गोडेत्’’ पुथी रेयाक् सार काथा ओलमें। 20
3. संताली पौराणिक सॉवहेत् लेकाते ‘‘काराम बिनती’’ रेनाक् काहनी काथा ओलमें। 20
4. नाटक दो चेत्को मेताक् काना ? संताली नाटक रेयाक् आसो्ल-आसो्ल तेतेद दो चेत् को काना ? पुस्टाव ते ओ्लमें। 20 भाग-B
5. लातार रे एम आकान कुकली को मुदखो़न जाहाँ गे मोड़े गोटाङ
(5) कुकली रेयाक् तेला ओलमें। (5 × 7 = 35)
(a) साधु रामचाँद मुर्मूवाक् ‘‘लिटा गोडेत्’’ पुथी रेयाक् सार काथा ओलमें। 20
3. संताली पौराणिक सॉवहेत् लेकाते ‘‘काराम बिनती’’ रेनाक् काहनी काथा ओलमें। 20
4. नाटक दो चेत्को मेताक् काना ? संताली नाटक रेयाक् आसो्ल-आसो्ल तेतेद दो चेत् को काना ? पुस्टाव ते ओ्लमें। 20 भाग-B
5. लातार रे एम आकान कुकली को मुदखो़न जाहाँ गे मोड़े गोटाङ
(5) कुकली रेयाक् तेला ओलमें। (5 × 7 = 35) संताली सॉवहेत् हाराबुरू रे एटाक् भारोतिया सॉवहेत् रेयाक् ओका-लेकान तारास मेनाक्-आ ? ओलमें।
(b) माँझी रामदास टुडूवाक् खाटो सॉवहेदिया ओपरोम ओलमें ।
(c) संताली सॉवहेत् हारा राकाप् रे ठाकुर प्रसाद मुरमूवाक् एनेम ओलमें।
(d) नाथनियल मुरमूवाक् सॉवहेत् जियोन खाटो ते ओलमें।
(e) नारायण सोरेन तोड़ेसुतामाक् संताली सॉवहेत् रे एनेम खाटो ते ओलमें।
(f) “कविगुरु स्वीन्द्रनाथ ठाकुराक् “गीताञ्जली” बाङला सॉवहेत् रेयाक् ओमोर काव्यकानखान किरतान काली हों संताली तेयाक् ओमोर काव्य कान गेया।" – नोवा काथा रेयाक् भेदतेत् ओलमें।
(g) सानताड़ सॉवता रे जोगमाझियाक् कामी होरा ओलमें। 6. "संताली पाथाम सॉवहेत् रेयाक् दोसा आर दिशा" - नोवा विसोय चेतान मित्टाङ ओनोल ओलमें। 20 7. डोमोन हाँसदा ओलाक् "आतु ओड़ाक्" उपन्यास रे ओका लेका सॉवता रेयाक् बाड़िजाक् कोय साहा गिडी आकादा ? ओनाको ओल सोदोर में। 20 8. संताली पारसी ते तोरजोमाय (अनुवाद) में : मनुष्य को जिसकी प्राप्ति से तृप्ति मिलती है, उसी से उसे आनन्द मिलता है। यह न केवल आध्यात्मिक है, न केवल सामाजिक, न केवल भौतिक। इसीलिए केवल आध्यात्मिक या केवल सामाजिक या केवल भौतिक सुख से मनुष्य तृप्त नहीं हो पाता। वह इन तीनों को एक साथ चाहता है। इन तीनों बिन्दुओं को मिला देने की साधना ही जीवन की सिद्धि है, यही त्रिपुर-रहस्य है, त्रिक्-दर्शन है; इच्छा, क्रिया और ज्ञान के लय का मार्ग यही है। 20\, E27SM6
Q2. साधु रामचाँद मुर्मूवाक् ‘‘लिटा गोडेत्’’ पुथी रेयाक् सार काथा ओलमें। 20
3. संताली पौराणिक सॉवहेत् लेकाते ‘‘काराम बिनती’’ रेनाक् काहनी काथा ओलमें। 20
4. नाटक दो चेत्को मेताक् काना ? संताली नाटक रेयाक् आसो्ल-आसो्ल तेतेद दो चेत् को काना ? पुस्टाव ते ओ्लमें। 20 भाग-B
5. लातार रे एम आकान कुकली को मुदखो़न जाहाँ गे मोड़े गोटाङ
(5) कुकली रेयाक् तेला ओलमें। (5 × 7 = 35)
(a) साधु रामचाँद मुर्मूवाक् ‘‘लिटा गोडेत्’’ पुथी रेयाक् सार काथा ओलमें। 20
3. संताली पौराणिक सॉवहेत् लेकाते ‘‘काराम बिनती’’ रेनाक् काहनी काथा ओलमें। 20
4. नाटक दो चेत्को मेताक् काना ? संताली नाटक रेयाक् आसो्ल-आसो्ल तेतेद दो चेत् को काना ? पुस्टाव ते ओ्लमें। 20 भाग-B
5. लातार रे एम आकान कुकली को मुदखो़न जाहाँ गे मोड़े गोटाङ
(5) कुकली रेयाक् तेला ओलमें। (5 × 7 = 35) संताली सॉवहेत् हाराबुरू रे एटाक् भारोतिया सॉवहेत् रेयाक् ओका-लेकान तारास मेनाक्-आ ? ओलमें।
(b) माँझी रामदास टुडूवाक् खाटो सॉवहेदिया ओपरोम ओलमें ।
(c) संताली सॉवहेत् हारा राकाप् रे ठाकुर प्रसाद मुरमूवाक् एनेम ओलमें।
(d) नाथनियल मुरमूवाक् सॉवहेत् जियोन खाटो ते ओलमें।
(e) नारायण सोरेन तोड़ेसुतामाक् संताली सॉवहेत् रे एनेम खाटो ते ओलमें।
(f) “कविगुरु स्वीन्द्रनाथ ठाकुराक् “गीताञ्जली” बाङला सॉवहेत् रेयाक् ओमोर काव्यकानखान किरतान काली हों संताली तेयाक् ओमोर काव्य कान गेया।" – नोवा काथा रेयाक् भेदतेत् ओलमें।
(g) सानताड़ सॉवता रे जोगमाझियाक् कामी होरा ओलमें। 6. "संताली पाथाम सॉवहेत् रेयाक् दोसा आर दिशा" - नोवा विसोय चेतान मित्टाङ ओनोल ओलमें। 20 7. डोमोन हाँसदा ओलाक् "आतु ओड़ाक्" उपन्यास रे ओका लेका सॉवता रेयाक् बाड़िजाक् कोय साहा गिडी आकादा ? ओनाको ओल सोदोर में। 20 8. संताली पारसी ते तोरजोमाय (अनुवाद) में : मनुष्य को जिसकी प्राप्ति से तृप्ति मिलती है, उसी से उसे आनन्द मिलता है। यह न केवल आध्यात्मिक है, न केवल सामाजिक, न केवल भौतिक। इसीलिए केवल आध्यात्मिक या केवल सामाजिक या केवल भौतिक सुख से मनुष्य तृप्त नहीं हो पाता। वह इन तीनों को एक साथ चाहता है। इन तीनों बिन्दुओं को मिला देने की साधना ही जीवन की सिद्धि है, यही त्रिपुर-रहस्य है, त्रिक्-दर्शन है; इच्छा, क्रिया और ज्ञान के लय का मार्ग यही है। 20\, E27SM6
Q3. संताली पौराणिक सॉवहेत् लेकाते ‘‘काराम बिनती’’ रेनाक् काहनी काथा ओलमें।
Q4. नाटक दो चेत्को मेताक् काना ? संताली नाटक रेयाक् आसो्ल-आसो्ल तेतेद दो चेत् को काना ? पुस्टाव ते ओ्लमें।
Q5. लातार रे एम आकान कुकली को मुदखो़न जाहाँ गे मोड़े गोटाङ
(5) कुकली रेयाक् तेला ओलमें। (5 imes 7 = 35)
(a) संताली सॉवहेत् हाराबुरू रे एटाक् भारोतिया सॉवहेत् रेयाक् ओका-लेकान तारास मेनाक्-आ ? ओलमें।
(b) माँझी रामदास टुडूवाक् खाटो सॉवहेदिया ओपरोम ओलमें ।
(c) संताली सॉवहेत् हारा राकाप् रे ठाकुर प्रसाद मुरमूवाक् एनेम ओलमें।
(d) नाथनियल मुरमूवाक् सॉवहेत् जियोन खाटो ते ओलमें।
(e) नारायण सोरेन तोड़ेसुतामाक् संताली सॉवहेत् रे एनेम खाटो ते ओलमें।
- (a) संताली सॉवहेत् हाराबुरू रे एटाक् भारोतिया सॉवहेत् रेयाक् ओका-लेकान तारास मेनाक्-आ ? ओलमें।
- (b) माँझी रामदास टुडूवाक् खाटो सॉवहेदिया ओपरोम ओलमें ।
- (c) संताली सॉवहेत् हारा राकाप् रे ठाकुर प्रसाद मुरमूवाक् एनेम ओलमें।
- (d) नाथनियल मुरमूवाक् सॉवहेत् जियोन खाटो ते ओलमें।
Q6. "संताली पाथाम सॉवहेत् रेयाक् दोसा आर दिशा" - नोवा विसोय चेतान मित्टाङ ओनोल ओलमें।
Q7. डोमोन हाँसदा ओलाक् "आतु ओड़ाक्" उपन्यास रे ओका लेका सॉवता रेयाक् बाड़िजाक् कोय साहा गिडी आकादा ? ओनाको ओल सोदोर में।
Q8. संताली पारसी ते तोरजोमाय (अनुवाद) में : मनुष्य को जिसकी प्राप्ति से तृप्ति मिलती है, उसी से उसे आनन्द मिलता है। यह न केवल आध्यात्मिक है, न केवल सामाजिक, न केवल भौतिक। इसीलिए केवल आध्यात्मिक या केवल सामाजिक या केवल भौतिक सुख से मनुष्य तृप्त नहीं हो पाता। वह इन तीनों को एक साथ चाहता है। इन तीनों बिन्दुओं को मिला देने की साधना ही जीवन की सिद्धि है, यही त्रिपुर-रहस्य है, त्रिक्-दर्शन है; इच्छा, क्रिया और ज्ञान के लय का मार्ग यही है।