Q5. हेठे देल सवालमन में से कोनो पाँच सवाल कर जबाब संक्षेप में लिखु।
(क) नागपुरी कवि घासीराम कर किरितिमनक चरचा आपन सबद में करु ।
(ख) कवि हनुमान सिंह कर कोनो एक ठो गीत कर आसय लिखु ।
(ग) शारदा प्र. शर्मा कर कोनो एक ठो किरिति कर बारे में चरचा करु।
(घ) कृष्ण प्र. साहु ‘कलाधर इया मधु मंसुरी’ ‘हँसमुख’ कर कोनो एक ठो गीत कर भाव के लिखु ।
(ङ) नागपुरी गीतमन में बंगला कर परभाव कर बारे में लिखु।
(च) सरहुल परब कर महातम के उजागर करु ।
(छ)
हेठे देल गद्यांस कर नागपुरी में अनुवाद करु।
आरम्भ में नागपुरी साहित्य लोकगीतों एवं कथा – कहावतों के रूप में रहा होगा, क्योंकि भाषा-साहित्य के विकास का यह अनिवार्य चरण है। इसकी मधुर धारा आज भी तरल – तरंगित है। यही स्वच्छन्द धारा कालक्रम से काव्यगुण मण्डित होकर शिष्ट साहित्य के धरातल पर उतरी होगी । नागपुरी साहित्य को इस धरातल पर लाने का अधिकांश श्रेय भक्ति – चेतना को रहा होगा, प्राप्त साहित्य से ऐसा ही प्रतीत होता है। जो भी हो, किन्तु इस धरातल पर आकर नागपुरी तीर्थरूप हो गई।