Section A
Q1. प्रत्येक प्रश्न अनिवार्य अछि। काव्य-वैशिष्ट्यकैं निर्दिष्ट करैत निम्नलिखित अवतरणक सप्रसंग व्याख्या करू, जाहिमे भाव स्पष्ट रहए (उत्तर अधिकतम 150 शब्दमे दातव्य) : 10× 5 = 50 ‘‘अम्बरे वदन झपावह गोरि
(a) राज सुनइ छिअ चान्दक चोरि। घरे घरे पहरी गेल अछ जोहि अबही दूषण लागत तोहि ॥ कतए नुकाओब चान्दक चोरि जतय नुकाओब ततहि उजोरि॥" "नव-नव गुन-गन स्रवन-रसायन नयन-रसायन अंग।
(b) रभस-सम्भाषन हृदय-रसायन परस-रसायन संग॥ ए सखि, रसमय अन्तर यार।" ‘‘चक्र गदा कर सरसिज संख
(c) देखि देवकी मन उपजल झंख कह बसुदेव देवकी कर जोरि कंस बाघ हम हरिनी खोरि रूप चतुर्भुज दिअ हरि छाड़ी नारद देत गए उकठी लाडी" "कर्म करत के आन, सुरदुर्ल्लभ हनुमान सन।
(d) हित के अहँक समान, सजल-नयन रघुनाथ कह।। अति साहसधर वीर, अविरल भक्तिक भवन अहँ। पिता अहाँक समीर, जगत्प्राण-सुत उचित थिक॥'' ‘‘विष सन अवस्था, पहाड सन जीवन
(e) संसारमे हमर के अछि अपन? कानी तँ चुप कैनिहार क्यौ नहि रूसी तैं बौंसनिहार क्यौ नहि हम पड़ल छी टूटल पुल जकाँ मौलैल, बिनु सूँघल फूल जकाँ" "विद्यापतिक पदावलीमे भावक कोमलता, शब्दक लालित्य तथा लय-माधुर्यक प्राञ्जल प्रवाह अछि।" पाठ्यांशक 2.
(a) आधारपर एहि उक्तिकैँ सविस्तार प्रतिपादित करू। 20 कवीश्वर चन्दा झा विरचित 'मिथिला-भाषा रामायण'क 'सुन्दर-काण्ड'मे वर्णित हनुमानक वीरता ओ पराक्रमक
(b) विवेचन करू।
(c) मनबोधक 'कृष्णजन्म' कृष्णकाव्य-परम्पराक सर्वोच्च उपलब्धि थिक-विश्लेषण करू। PHKM-B-MTLI/17 \overline2