Section A
Q1. निम्नलिखितमेर्सं कोनो एक विषयपर 600 शब्दमे निबन्ध लिखू: 100 भारतमे स्वास्थ्य सेवा सभक स्थिति
(a) भारतीय कृषक कानून, 2020क सार्थकता
(b) राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020क चुनौती सभ
(c) वर्त्तमान समयमे कृत्रिम बुद्धि (AI)क उपयोगिता
(d) 2. निम्नलिखित गद्यांशकैं ध्यानपूर्वक पढ़ू आ ओहि आधार पर निम्नस्थ प्रश्न सभक उत्तर सही एवं संक्षिप्त भाषामे दिअ 12×5 = 60 जीवन आओर पर्यावरण एक दोसरासँ गहींर रूपमा जुड़ल अछि। समस्त जीवधारीक जीवन पर्यावरण पर निर्भर करैत अछि। तैं हमर सभक तन ओ मोनक रचना, शक्ति, सामर्थ्य आओर अद्वितीय विशेषता सभ पर्यावरण द्वारा बनल, विकसित एवं कायम रखैल जाइत अछि। फलतः जीवन आओर पर्यावरण एतेक घनिष्ठ रूपसँ जुड़ल अछि कि दुनूक सह-अस्तित्व आवश्यक अछि। पर्यावरण हमर रक्षा-कवच अछि जे प्रकृतिसँ हमरा सभक सभके उपहारक रूपमे भेटल अछि, ई पालनहार आओर जीवनाधार अछि। पर्यावरण मूलतः प्रकृतिक देन थिक। ई भूमि, वन-पहाड़, नदी-झरना, मरुस्थल-मैदान घास, उपत्यका, रंग-विरंगक पशु-पक्षी, निर्मल जलसै लहलहाइत झील आओर सरोवर सभसैं भरल अछि। एहि पर बहैत शीतल मन्द सुगन्धित बसात आ उमड़ैत ओ अमृतधार बरसबैत मेघ प्रकृतिक अंग अछि। ई सभ धरा पर बरसबयबला मानवलोकनिक विकास आओर सुख-समृद्धिक लेल एक सन्तुलित पर्यावरणक निर्माण करैत अछि। परश्च पर्यावरणक ई प्राकृतिक सन्तुलन बहुत तीव्र गतिसँ बिगड़ल जा रहल अछि। आश्चर्य होइत अछि जे मानव धरतीक एहि स्रोत सभकैँ कतेक निर्मम भऽ कऽ दोहन ओ नष्ट-भ्रष्ट करैत जा रहल अछि, ओ लोकनि एहि वरदानकैं एहि प्रकारें अविवेकपूर्ण ढंगर्स दुरुपयोग कयने जा रहल छथि कि सम्पूर्ण प्रकृति-तन्त्र गड़बड़ा गेल अछि। आब ओ दिन दूर नहि लगैत अछि जे धरती पर सैकड़ो वर्षक पुरनका हिमयुग घूमि आबय किंबा ध्रुव पर जमल बर्फक मोटका परत पिघलि जयबासँ समुद्रक प्रलयकारी लहरि नगरक नगर, वन-पर्वत आओर जीव-जन्तू सभकेँ गीरि जाय। निश्चये पर्यावरणकैं विकृत आओर दूषित करयवाली समस्त विपत्ति हम सभ अपनेसैं नोत दय आमन्त्रित कयलहुँ अछि। हम सभ स्वयं प्रकृतिक सन्तुलनकैं बिगाड़ि रहलहुँ अछि। एही असंतुलनसँ भूमि, वायु, पानि आओर ध्वनिक प्रदूषण उत्पन्न होइत अछि। पर्यावरण प्रदूषणसँ फेंफड़ाक रोग, हृदय आओर पेटक बिमारी, दृश्य आओर श्रव्यबाधित, मानसिक तनाव एवं अन्य तनाव-सम्बन्धित बिमारी सभ होइत अछि। हम सभ जानैत छी जे धरती पर जन-जीवन प्रकृति सन्तुलनहिसँ संभव भऽ सकैत अछि। धरती वनस्पति सभर्सै ढकि नहि जाय, एहि लेल घास खायवला जानवर पर्याप्त संख्यामे छल। एहि घास खायवला जानवर सभक संख्याकैं सन्तुलित एवं सीमित रखबाक लेल हिंसक जन्तु सभ सेहो छल। एहि तीनूक अनुपात सन्तुलित ओ नियन्त्रित छल। आधुनिक युगमे वैज्ञानिक आविष्कार आओर उद्योग-धंधा सभक विस्तृत विकासक संग-संग जनसंख्या सेहो भयावह विस्फोट भेल अछि। एहि कथनक आशय स्पष्ट करू जे "जीवन आ पर्यावरण एक दोसरासँ गहींर रूपमा जुड़ल अछि"।
(a) URC-C-MTL/38 2