Q1.
अपठित पद्य निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे लिखे प्रश्नों (1-4) के उत्तर दीजिये :
सच है, मनुज बड़ा पापी है, नर का वध करता है।
पर, भूलो मत, मानव के हित मानव ही मरता है।
लोभ, द्रोह, प्रतिशोध, वैर, नरता के विघ्न अमित हैं।
तप, बलिदान, त्याग के सम्बल भी न किन्तु परिमित हैं।
मत सोचो दिन रात पाप में मनुज निरत होता है।
हाय, पाप के बाद वही तो पछताता रोता है॥
यह क्रन्दन, यह अश्रु मनुज की आशा बहुत बड़ी है।
बतलाता है, यह मनुष्यता अब तक नहीं भरी है।
नहीं एक अवलम्ब, जगत का आभा पुण्यव्रती की।
तिमिर व्यूह में फँसी किरण भी आशा है धरती की॥
उपर्युक्त अवतरण में 'नरता' के कौन-कौन से विघ्न माने गये हैं?
- (1) अंध, लोभ, वैर, प्रतिशोध
- (2) वैर, प्रतिशोध, द्रोह, लोभ
- (3) द्रोह, वैर, मोह, लोभ
- (4) लोभ, मद, मोह, प्रतिशोध