RPSC Stenographer Exam 2011 Hindi Stenography Paper PDF

Rajasthan Government Jobs Clerk / Office Staff 2011

  • Year 2011
  • Conducted By RPSC
  • Languages Hindi

Exam Details

Detail Information
Examination STENOGRAPHER COMP. EXAM 2011
Year 2011
Conducting Body RPSC
Paper HINDI STENOGRAPHY PAPER
Subject Hindi Stenography
Question Type Descriptive / Subjective

This is the official Hindi Stenography Paper for the Stenographer Exam 2011, conducted by the Rajasthan Public Service Commission (RPSC). This paper, part of Session 1, is crucial for candidates preparing for stenography roles under the Rajasthan government. Aspirants can use this document to understand the exam pattern, question types, and difficulty level, aiding their preparation for future examinations. The paper focuses on Hindi Stenography, a key skill for the position.

Major Topics Covered

  • Rules and Discipline
  • Importance of Order
  • Success in Business and Society
  • Systematic Approach

Why This Paper is Important

  • Useful for STENOGRAPHER EXAM 2011 preparation
  • Helps understand the latest exam pattern
  • Useful for practice and self-assessment
  • Covers frequently asked General Studies topics
  • Helpful for analysing question trends

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Instructions

  • RAJASTHAN PUBLIC SERVICE COMMISSION, AJMER STENOGRAPHER EXAM 2011 HINDI STENOGRAPHY PAPER (SESSION -
  • किसी काम को व्यवस्था के साथ किया जाए तो उसमें कोई भी परेशानी नहीं होती। यदि हमारे कामों में व्यवस्था की थोड़ी-सी भी त्रुटि हो जाये, तो हमारे काम बिगड़ जाते हैं और हम उन्नति नहीं कर सकते हैं। सभी बड़ी–बड़ी संस्थायें नियमानुसार ही चल रही हैं। बिना नियम और अनुशासन के न तो कोई व्यवसाय चल सकता है और न सामाजिक उन्नति ही की जा सकती है। क्या व्यापारी और क्या नेता, सभी को नियमपूर्वक कार्य करने से ही सफलता प्राप्त होती है। व्यवसाय में तो विशेष तौर पर नियम तथा व्यवस्था अत्यन्त आवश्यक है। बिना किसी दक्ष प्रबन्धक के, और अनियमितता दूर किए बिना व्यवसाय में सफलता प्राप्त कर पाना असम्भव है। किसी भी बड़े कारखाने को देख लीजिए, नियमपूर्वक काम कर पाने से ही वह उन्नत हो सका है। यदि नियम में थोडी–सी भी गड़बड़ी हो जाये तो सारा व्यवसाय ही चौपट हो जाये। यही नहीं, कोई भी और कितना ही जटिल व्यवसाय हो, व्यवस्था से ही सुचारू रूप से चल सकता है। कई अव्यवस्थित व्यक्ति यह सोचते हैं कि मुख्य लक्ष्य की ओर देखना ही आवश्यक है। सम्बन्धित बातों की विशेष व्यवस्था करने की आवश्यकता नहीं, परन्तु वास्तविकता यह है कि लक्ष्य से सम्बन्धित छोटी–छोटी बातों की व्यवस्था परमावश्यक है। जो व्यक्ति छोटी–छोटी बातों को ध्यान में नहीं रखता, उससे यह आशा कैसे की जा सकती है कि वह बड़ी एवं जटिल बातों को सँभाल लेगा ? यदि छोटी–छोटी बातों की ओर ध्यान न दिया जाए तो सारा व्यवसाय ही चौपट हो जाये । यदि व्यवस्था न की जाये तो व्यक्तियों का बहुत-सा समय और धन नष्ट हो जाये। उचित व्यवस्था करके ही शक्ति और समय की बचत की जा सकती है। नियम पर चलते रहने से समय और शक्ति दोनों की बचत होती है। नियमित व्यक्ति अपनी वस्तुओं को इधर–उधर नहीं फेंकते, बल्कि एक नियत स्थान पर रखते हैं, जिससे उन्हें ढूँढ़ने में समय या शक्ति नष्ट नहीं करनी पड़ती। इस प्रकार उनकी शक्ति और समय अन्य लाभप्रद कार्यों में लगते हैं। नियम-पालन करते अर्थात व्यवस्था में रहने से ऐसी बुद्धि स्फुटित होती है, जिसकी सहायता से बड़े-से-बड़े काम बहुत आसानी से हो सकते हैं। व्यवस्था के कारण नियमित व्यक्ति थोड़े समय में इतना अधिक काम कर लेता है कि लोगों को आश्चर्य होने लगता है। व्यवस्थित होने के कारण उसे सफलता–ही–सफलता मिलती जाती है। जबकि अनियमित व्यक्ति असफल ही होता है। अतः यह आवश्यक है कि नियमों का पालन दृढ़तापूर्वक किया जाये । तब उद्देश्य पूर्ण हो सकता है अन्यथा नहीं ।

Questions (page 2)

Q1.

(a) समाज की उन्नति भी नियम और अनुशासन पर ही आश्रित है। यदि नियमों के क्रम को समाप्त कर दिया जाये तो उन्नति रूक जायेगी। क्या साहित्य, क्या समाज, और क्या धर्म, सभी की उन्नति नियमों का कड़ाई के साथ पालन करने के कारण ही हो सकती है। जिस साहित्य, समाज और जिस धर्म के नियमों का पालन दृढ़ता से नहीं हो सका, वह साहित्य, समाज और धर्म नष्ट हो गया । केवल दस अंकों की व्यवस्था के आधार पर ही गणित में आशातीत उन्नति प्राप्त की जा सकती है।

(b) वर्तमान समय की बड़ी से बड़ी मशीनें व्यवस्था के कारण ही सफलतापूर्वक काम कर रही हैं। उनकी व्यवस्था के कुछ आधारभूत नियम हैं। उन्हीं के अनुसार वे अपना कार्य कर रही हैं। यदि उनके नियमों अथवा व्यवस्था में थोड़ी-सी भी कमी की जाए या ढील दे दी जाये, तो वे मशीनें काम करना बन्द कर दें और सब बेकार ही पड़ी रह जायें।

(c) नियम द्वारा कठिन से कठिन एवं पेचीदा काम भी सरल हो जाता है। आकाश के तारे तथा अन्य ग्रह कितनी व्यवस्था से और नियमपूर्वक अपने-अपने मार्ग पर चल रहे हैं। इनमें तनिक–सी भी गड़बड़ी नहीं हो पाती। यदि हो जाये तो सारे संसार में प्रलय हो जाए और संसार समाप्त हो जाये।

(d) वैज्ञानिक लोग संसार के असंख्य पदार्थों को दूरबीन की सहायता से देखते रहते हैं और आवश्यकता के समय वे उनके बारे में सब कूछ बता देते हैं। ऐसा इसलिए सम्भव हो पाता है कि वैज्ञानिक उन पदार्थों का अध्ययन करते समय उनके नियमों का भी अध्ययन करते हैं। तब ही उनके बारे में कुछ बता देते हैं।

(e) हम धर्म, राजनीति, व्यापार, शिक्षा, यात्रा और सरकार आदि की बातें करते हैं, पर क्या हम यह भी जानते हैं कि इन बातों के बारे में हमने ज्ञान कैसे प्राप्त किया और उसे नियमबद्ध करके पुस्तकों में लिपिबद्ध किया। इन सबके लिए नियमानुसार कार्य करना अपेक्षित रहा है।

(f) सफलता प्राप्त करने के लिए नियम पालन करने की अत्यन्त आवश्यकता है। नियमों ने ही समाज, देश, राष्ट्र एवं संसार के लोगों को एक सूत्र में बाँध रखा है, यद्यपि हमारे विचार, स्वार्थ तथा उद्देश्य भिन्न-भिन्न हैं। इसमें कोई संदेह नही है कि संसार में ऐसे व्यक्ति भी है जो किसी नियम, व्यवस्था अथवा अनुशासन को नहीं मानते। कुछ लोग नियमों के आधार पर समाज को एकता के सूत्र में बाँध देते हैं।

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Frequently asked questions

What is the name of the exam?

The exam is the STENOGRAPHER COMP. EXAM 2011.

Which conducting body organized this exam?

The exam was conducted by the RAJASTHAN PUBLIC SERVICE COMMISSION, AJMER (RPSC).

What is the subject of this paper?

The subject of this paper is Hindi Stenography.

What year was this exam held?

The exam was held in 2011.

What is the session for this paper?

This is the Hindi Stenography Paper for SESSION - 1.

What type of questions are expected in this paper?

Based on the provided text, this appears to be a descriptive or essay-type paper, focusing on the importance of rules and discipline.

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