Q1.
(a) समाज की उन्नति भी नियम और अनुशासन पर ही आश्रित है। यदि नियमों के क्रम को समाप्त कर दिया जाये तो उन्नति रूक जायेगी। क्या साहित्य, क्या समाज, और क्या धर्म, सभी की उन्नति नियमों का कड़ाई के साथ पालन करने के कारण ही हो सकती है। जिस साहित्य, समाज और जिस धर्म के नियमों का पालन दृढ़ता से नहीं हो सका, वह साहित्य, समाज और धर्म नष्ट हो गया । केवल दस अंकों की व्यवस्था के आधार पर ही गणित में आशातीत उन्नति प्राप्त की जा सकती है।
(b) वर्तमान समय की बड़ी से बड़ी मशीनें व्यवस्था के कारण ही सफलतापूर्वक काम कर रही हैं। उनकी व्यवस्था के कुछ आधारभूत नियम हैं। उन्हीं के अनुसार वे अपना कार्य कर रही हैं। यदि उनके नियमों अथवा व्यवस्था में थोड़ी-सी भी कमी की जाए या ढील दे दी जाये, तो वे मशीनें काम करना बन्द कर दें और सब बेकार ही पड़ी रह जायें।
(c) नियम द्वारा कठिन से कठिन एवं पेचीदा काम भी सरल हो जाता है। आकाश के तारे तथा अन्य ग्रह कितनी व्यवस्था से और नियमपूर्वक अपने-अपने मार्ग पर चल रहे हैं। इनमें तनिक–सी भी गड़बड़ी नहीं हो पाती। यदि हो जाये तो सारे संसार में प्रलय हो जाए और संसार समाप्त हो जाये।
(d) वैज्ञानिक लोग संसार के असंख्य पदार्थों को दूरबीन की सहायता से देखते रहते हैं और आवश्यकता के समय वे उनके बारे में सब कूछ बता देते हैं। ऐसा इसलिए सम्भव हो पाता है कि वैज्ञानिक उन पदार्थों का अध्ययन करते समय उनके नियमों का भी अध्ययन करते हैं। तब ही उनके बारे में कुछ बता देते हैं।
(e) हम धर्म, राजनीति, व्यापार, शिक्षा, यात्रा और सरकार आदि की बातें करते हैं, पर क्या हम यह भी जानते हैं कि इन बातों के बारे में हमने ज्ञान कैसे प्राप्त किया और उसे नियमबद्ध करके पुस्तकों में लिपिबद्ध किया। इन सबके लिए नियमानुसार कार्य करना अपेक्षित रहा है।
(f) सफलता प्राप्त करने के लिए नियम पालन करने की अत्यन्त आवश्यकता है। नियमों ने ही समाज, देश, राष्ट्र एवं संसार के लोगों को एक सूत्र में बाँध रखा है, यद्यपि हमारे विचार, स्वार्थ तथा उद्देश्य भिन्न-भिन्न हैं। इसमें कोई संदेह नही है कि संसार में ऐसे व्यक्ति भी है जो किसी नियम, व्यवस्था अथवा अनुशासन को नहीं मानते। कुछ लोग नियमों के आधार पर समाज को एकता के सूत्र में बाँध देते हैं।