Section A
Q1.
(ग)
अनुच्छेद आधारित बोधात्मक प्रश्नों के उत्तर दें :
“हमारी हिन्दी सजीव भाषा है। इसी कारण, इसने अरबी, फारसी आदि के सम्पर्क में आकर इनके तो शब्द ग्रहण किए ही हैं, अब अंग्रेजी के भी शब्द ग्रहण करती जा रही है। इसे दोष नहीं गुण समझना चाहिए, क्योंकि अपनी इस ग्रहण शक्ति से हिन्दी अपनी वृद्धि कर रही है, ह्रास नहीं । ज्यों-ज्यों इसका प्रसार-प्रचार बढ़ेगा, त्यों-त्यों इसमें नए शब्दों का आगमन होता जाएगा । क्या इस भाषा के किसी भी पक्षपाती में यह शक्ति है कि वह विभिन्न जातियों के पारस्परिक संबंध को न होने दे अथवा भाषाओं की समिश्रण–क्रिया में रुकावट पैदा कर दे ? यह कभी संभव नहीं । हमें तो केवल इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इस सम्मिश्रण के कारण हमारी भाषा अपने स्वरूप को तो नष्ट नहीं कर रही – कहीं अन्य भाषाओं के बेमेल शब्दों के मिश्रण से अपना स्वरूप तो विकृत नहीं कर रही ।"
प्रश्न :
(I) हिन्दी कैसी भाषा है ?
(II) हिन्दी में नए शब्दों को अपनाते समय किस बात को ध्यान में रखना चाहिए ?
(III) हिन्दी में नए शब्दों का आगमन क्यों उचित है ?
(IV) भाषा का स्वरूप नष्ट न हो इसके लिए किस बात का ध्यान रखना है ?
(V) हिन्दी भाषा की वह कौन सी विशेषता है जिसे लेखक ने गुण माना है ?
(घ)
निम्नलिखित अवतरण का संक्षेपण एक तिहाई शब्दों में करते हुए उपयुक्त शीर्षक दीजिए :
“गेटे ने कहा है कि दुनिया नौजवानों को इसलिए चाहती है कि वे होनहार होते हैं । मगर, चालीस वर्ष का आदमी तो बहुत कुछ हो गया रहता है। फिर उसे कोई प्यार और प्रोत्साहन देने वाली दृष्टि से क्यों देखे ? जो तन के जवान हैं, दुनिया उनका जुल्म सहकर भी उन्हें प्रोत्साहन देती किंतु चालीस के बाद के आदमी की, चाहे वह मन से जवान क्यों न हो, समाज में आलोचना शुरू हो जाती है । यह समय वह होता है जब प्रशंसा और प्रोत्साहन बदलकर उम्मीद बन जाते हैं । इसलिए संसार चालीस के बाद के मनुष्य को देता कम, उससे चाहता अधिक है । अब लोग हमारी टहनियाँ नहीं गिनते, हमारे पत्तों की हरियाली से तृप्त नहीं होते । अब तो वे हमारे फल ही गिनेंगे और यही वह बिंदु है, जहाँ चालीस के शिकार को जीवन में नई दिशा की खोज करनी चाहिए और वह नई दिशा है – अवसे माँगों कम, किंतु दान अधिक दो ।”