Section ख
Q5.
हेठे देल सवालमन में से कोनो पांच ठो सवाल कर जबाब संक्षेप में लिखु :
निम्नलिखित गद्यांश का नागपुरी में अनुवाद करू :
नागपुरी लोक और शिष्ट साहित्य : नागपुरी लोकसाहित्य का संकलन और प्रकाशन नहीं के बराबर हुआ है जबकि शिष्ट साहित्य का प्रकाशन बराबर हो रहा है। नागपुरी लोकसाहित्य आज भी मौखिक रूप में ही प्राप्य है। ग्रामीण जन द्वारा रचित होने के कारण लोकसाहित्य की भाषा स्वतंत्र एवं जीवन्त है। परन्तु इस पर शास्रीयता का अंकुश नहीं है। लोकसाहित्य के रचनाकारों के नाम ज्ञात नहीं हैं। निष्कर्ष स्वरूप यह कहा जा सकता है कि नागपुरी लोकसाहित्य किसी प्रकार के नियमों के बन्धनों से मुक्त विस्तृत परिधि वाली स्वच्छंद गति से प्रवाहित एक धारा है। जबकि नागपुरी शिष्ट साहित्य चुने हुए कुछ भावों को लेकर सजायी-संवारी हुई एक बंधी नहर है, जिसे स्वतंत्र रूप से बहने की स्वतंत्रता नहीं।
(क) कृष्ण प्रसाद साह ‘कलाधर’ कर किरितिमनक चरचा आपन सब्द में करु।
(ख) मधु मंसूरी 'हसमुँख' कर कोनो एक ठो गीत कर आसय लिख।
(ग) नागपुरी कवि कंचन कर जीवन परिचय देऊ।
(घ) “फा॰ पीटर शास्त्री नवरंगी” इया “लाल रणविजय नाथ शाहदेव” कर जीवन परिचय देते किरितिमनक चरचा करु।
(ङ) बंगला झूमइर लोकनृत्य उपरे चरचा करु।
(च) करम परब कर महानम उपरे चरचा करु।
(छ) शारदा प्रसाद शर्मा कर जीवन परिचय देते उनकर किरितिमनक बरनन करु।