Q1.
निम्नलिखित लेखांश का लगभग एक-तिहाई शब्दों में संक्षेपण कीजिए एवं इसके लिए एक उपयुक्त शीर्षक भी सुझाइए :
Make a precis of the following passage in about one-third of its length and suggest a suitable title for it:
(a) किसी समुदाय या समाज के कामकाज को अचानक गंभीर रूप से बाधित करने वाली विपत्तिकारक घटना को आपदा कहा जाता है। यह मानवीय, भौतिक, आर्थिक या पर्यावरणीय हानि का कारण बनती है जो समुदाय या समाज को अपने संसाधनों का उपयोग करके सामना करने की क्षमता से अधिक होता है । जब किसी घटना से हुई हानि और विनाश का आकार बहुत अधिक हो उसे आपदा की श्रेणी में रखा जा सकता है। असहाय लोगों पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक पड़ता है।
(b) किसी आपदा की गंभीरता के पीछे व्यक्तियों का असहाय होना ही प्रमुख कारण है। असहाय व्यक्तियों में विस्थापित जनसंख्या, प्रवासी, हाशिए पर रहने वाले, वर्जित या निराश्रित लोग, युवा बच्चे, गर्भवती महिलाएँ, बुजुर्ग और दिव्यांग शामिल हैं । असहायता अनेक कारणों से पैदा होती है । ग़रीबी, विचारधाराएँ, आर्थिक व्यवस्था, आयु, लिंग, बीमारी, दिव्यांगता असहायता के कुछ अंतर्निहित कारण हैं । इन प्रत्यक्ष कारणों के अतिरिक्त शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण का अभाव, जनसंख्या आधिक्य, शहरीकरण और पर्यावरणीय क्षरण जनसंख्या में असहायता उत्पन्न करने वाले कुछ गतिशील दबाव हैं।
(c) आपदाओं को प्राकृतिक आपदा और मानव-निर्मित आपदा में वर्गीकृत किया जा सकता है । प्राकृतिक आपदाएँ वे हैं जो प्राकृतिक कारणों से आती हैं । मनुष्य केवल विध्वंस की मात्रा को कुछ सीमा तक परिवर्तित कर सकता है, किन्तु प्राकृतिक आपदाओं का आना अपरिहार्य है । ये हैं — बर्फीले तूफान, आँधी-तूफान, बवंडर, सूखा, ओलावृष्टि, पाला, लू, चक्रवात, भूकंप, भूस्खलन, हिमस्खलन, ज्वालामुखी विस्फोट, बाढ़, तूफानी लहरें, सुनामी, फंगल और वायरल बीमारियाँ, आदि । दूसरी ओर मानव-निर्मित आपदाएँ मनुष्यों की अनियोजित और अतार्किक गतिविधियों के कारण घटित होती हैं । ये आपदाएँ, यातायात आपदाएँ, इंजीनियरिंग विफलताएँ, आपराधिक कृत्य, भगदड़, दंगे और युद्ध, नाभिकीय दुर्घटनाएँ, आदि हैं ।
(d) आपदा का प्रबंधन, आपदा की प्रकृति पर निर्भर करता है जैसे बाढ़ को नियंत्रित करने की रणनीतियाँ ज्वालामुखी विस्फोट से पूर्णतया भिन्न हैं । यही नहीं, रणनीतियाँ विध्वंस की मात्रा पर भी निर्भर करती हैं । कुछ आपदाओं की प्रकृति वैश्विक होती है, अतः उनमें सभी देशों की सहायता की आवश्यकता होती है । दूसरी ओर, कुछ आपदाओं का केवल जिला स्तर पर प्रबंधन किया जा सकता है। फिर भी कुछ ऐसी सार्वभौमिक संरचनाएँ भी हैं जिन्हें आपदाओं के प्रबंधन के लिए सभी जगह लागू किया जा सकता है । इनको पूर्व-आपदा और आपदा-पश्चात् अवधियों में वर्गीकृत किया जा सकता है ।
(e) आपदाओं के प्रबंधन का प्रारम्भ आपदा के आने से बहुत पहले से ही शुरू कर दिया जाता है । इस पूर्व-आपदा प्रबंधन से आपदाओं के प्रभावों को बड़ी सीमा तक कम किया जा सकता है । कभी-कभी इससे मानव-निर्मित आपदाओं के आने को रोका भी जा सकता है । पूर्व-आपदा अवधि में प्रबंधन की प्रमुख रणनीतियाँ हैं — रोकथाम, शमन और तैयारियाँ ।