Section A
Q1. निम्नलिखित काव्यांशों की लगभग 150 शब्दों में ऐसी व्याख्या कीजिए कि इसमें निहित काव्य-मर्म भी उद्घाटित हो सके:
(a)
जीवन मुँहचाही को नीको,
दरस परस दिन रात करति है कान्ह पियारे पी को ।
नयनन मूँदि-मूँदि किन देखौ बँध्यो ज्ञान पोथी को ।
आछे सुन्दर स्याम मनोहर और जगत सब फीको ।
‘सुनौ जोग को का लै कीजै जहाँ ज्यान ही जी को ?’
खाटी मही नही रुचि मानै सूर खवैया घी को ।।
(b)
ऋषिनारि उधारि कियो सठ केवट मीत पुनीत सुकीर्ति लही ।
निजलोक दियो सबरी खग को कपि थाप्यो सो मालुम है सबही।
दससीस विरोध सभीत विभीषण भूप कियो जग लीक रही।
करुणानिधि को भजु रे तुलसी रघुनाथ अनाथ के नाथ सही ।
(c)
(i) सायक सम मायक नयन रंगे त्रिविध रंग गात ।
झखौ बिलखि दृरि जात जल लखि जलजात लजात ।।
(ii) सब ही त्यौं समुहाति छिनु, चलति सबनु दै पीठि ।
वाही त्यौं ठहराति यह, कविलनवी लौं दीठि ।।
(d)
अंधकार के अट्टहास सी मुखरित सतत चिरंतन सत्य,
छिपी सृष्टि के कण-कण में तू यह सुंदर रहस्य है नित्य ।
जीवन तेरा क्षुद्र अंश है व्यक्त नील घनमाला में,
सौदामिनी संधि सा सुंदर क्षण भर रहा उजाला में ।
(e)
पिस गया वह भीतरी
औ' बाहरी दो कठिन पाटों वीच,
ऐसी ट्रेजिडी है नीच !!
बावड़ी में वह स्वयं
पागल प्रतीकों में निरन्तर कह रहा
वह कोठरी में किस तरह
अपना गणित करता रहा
औ' मर गया ।