Section A
Q1. निम्नलिखित काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या लगभग 150 शब्दों (प्रत्येक) में कीजिए:
(a)
तात राम नहिं नर भूपाला ।
भुवनेश्वर कालहु कर काला ।।
ब्रह्म अनामय अज भगवंता ।
व्यापक अजित अनादि अनंता ।।
(b)
कुहुकि कुहुकि जसि कोइल रोई ।
रकत आँसु घुँघुची बन बोई ।।
पै कर मुखी नैन तन राती ।
को सिराव बिरहा दु:ख ताती ।।
(c)
विषमता की पीड़ा से व्यस्त,
हो रहा स्पंदित विश्व महान ।
यही दु:ख सुख विकास का सत्य,
यही भूमा का मधुमय दान ।
(d)
विचलित होने का नहीं देखता मैं कारण,
हे पुरुषसिंह, तुम भी यह शक्ति करो धारण,
आराधन का दृढ़ आराधन से दो उत्तर,
तुम वरो विजय संयत प्राणों से प्राणों पर ।
(e)
सुना आपने जो वह मेरा नहीं,
न वीणा का था :
वह तो सब कुछ की तथता थी
महाशून्य, वह महामौन
अविभाज्य, अनावृत, अद्रवित, अप्रमेय
जो शब्दहीन सब में गाता है ।