UPSC Civil Services Prelims 2019 General Studies Paper II PDF

Central Government Jobs Administrative / Civil Services 2019

  • Year 2019
  • Conducted By UPSC
  • Questions 80
  • Maximum Marks 200
  • Duration Two Hours
  • Languages Hindi & English

Exam Details

Detail Information
Examination Civil Services (Preliminary) Examination
Year 2019
Conducting Body UPSC
Paper General Studies Paper-II
Subject General Studies
Duration Two Hours
Maximum Marks 200
Number of Questions 80
Question Type Objective (MCQ)

This is the General Studies Paper-II from the UPSC Civil Services (Preliminary) Examination held in 2019. The paper consists of 80 objective-type questions, divided into Hindi and English sections, carrying a total of 200 marks. Candidates are allowed two hours to complete the paper. This paper is crucial for aspirants aiming to clear the UPSC Civil Services Preliminary exam, testing their understanding of various general studies topics. Analyzing this paper helps in understanding the exam pattern, question types, and difficulty level.

Major Topics Covered

  • Political Theory
  • Historical Injustice
  • Social Discrimination
  • Economic Deprivation
  • Education
  • Culture
  • Globalization

Why This Paper is Important

  • Useful for Civil Services (Preliminary) Examination preparation
  • Helps understand the latest exam pattern
  • Useful for practice and self-assessment
  • Covers frequently asked General Studies topics
  • Helpful for analysing question trends

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Instructions

  • परीक्षा प्रारम्भ होने के तुरन्त बाद, आप इस परीक्षण पुस्तिका की पड़ताल अवश्य कर लें कि इसमें कोई बिना छपा, फटा या छूटा हुआ पृष्ठ अथवा प्रश्नांश, आदि न हो ।
  • यदि ऐसा है, तो इसे सही परीक्षण पुस्तिका से बदल लें ।
  • कृपया ध्यान रखें कि OMR उत्तर-पत्रक में, उचित स्थान पर, रोल नम्बर और परीक्षण पुस्तिका अनुक्रम A, B, C या D को, ध्यान से एवं बिना किसी चूक या विसंगति के भरने और कूटबद्ध करने की जिम्मेदारी उम्मीदवार की है ।
  • किसी भी प्रकार की चूक/विसंगति की स्थिति में उत्तर-पत्रक निरस्त कर दिया जाएगा ।
  • इस परीक्षण पुस्तिका पर साथ में दिए गए कोष्ठक में आपको अपना अनुक्रमांक लिखना है। परीक्षण पुस्तिका पर और कुछ न लिखें।
  • इस परीक्षण पुस्तिका में 80 प्रश्नांश (प्रश्न) दिए गए हैं ।
  • प्रत्येक प्रश्नांश हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों में छपा है ।
  • प्रत्येक प्रश्नांश में चार प्रत्युत्तर (उत्तर) दिए गए हैं ।
  • इनमें से एक प्रत्युत्तर को चुन लें, जिसे आप उत्तर पत्रक पर अंकित करना चाहते हैं।
  • यदि आपको ऐसा लगे कि एक से अधिक प्रत्युत्तर सही हैं, तो उस प्रत्युत्तर को अंकित करें जो आपको सर्वोत्तम लगे ।
  • प्रत्येक प्रश्नांश के लिए केवल एक ही प्रत्युत्तर चुनना है।
  • आपको अपने सभी प्रत्युत्तर अलग से दिए गए उत्तर-पत्रक पर ही अंकित करने हैं ।
  • इससे पहले कि आप परीक्षण पुस्तिका के विभिन्न प्रश्नांशों के प्रत्युत्तर उत्तर-पत्रक पर अंकित करना शुरू करें, आपको प्रवेश प्रमाण-पत्र के साथ प्रेषित अनुदेशों के अनुसार कुछ विवरण उत्तर-पत्रक में देने हैं ।
  • आप अपने सभी प्रत्युत्तरों को उत्तर-पत्रक में भरने के बाद तथा परीक्षा के समापन पर केवल उत्तर-पत्रक अधीक्षक को सौंप दें ।
  • आपको अपने साथ परीक्षण पुस्तिका ले जाने की अनुमति है ।
  • कच्चे काम के लिए पत्रक परीक्षण पुस्तिका के अंत में संलग्न हैं।
  • ग़लत उत्तरों के लिए दंड: उम्मीदवार द्वारा दिए गए गलत उत्तरों के लिए दंड दिया जाएगा ।
  • प्रत्येक प्रश्न के लिए चार वैकल्पिक उत्तर हैं ।
  • उम्मीदवार द्वारा प्रत्येक प्रश्न के लिए दिए गए एक गलत उत्तर के लिए प्रश्न हेतु (i) नियत किए गए अंकों का एक-तिहाई दंड के रूप में काटा जाएगा ।
  • यदि कोई उम्मीदवार एक से अधिक उत्तर देता है, तो इसे ग़लत उत्तर माना जाएगा, यद्यपि दिए गए उत्तरों में से एक उत्तर सही (ii) होता है, फिर भी उस प्रश्न के लिए उपर्युक्तानुसार ही, उसी तरह का दंड दिया जाएगा ।
  • यदि उम्मीदवार द्वारा कोई प्रश्न हल नहीं किया जाता है, अर्थात् उम्मीदवार द्वारा उत्तर नहीं दिया जाता है, तो उस प्रश्न के लिए (iii) कोई दंड नहीं दिया जाएगा ।
  • जब तक आपको यह परीक्षण पुस्तिका खोलने को न कहा जाए तब तक न खोलें Note: English version of the instructions is printed on the back cover of this Booklet. (1 - A)

Questions (page 2)

Q1. निर्देश : निम्नलिखित सात परिच्छेदों को पढ़िए और प्रत्येक परिच्छेद व बाद आने वाले प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए । इन प्रश्नांशों के लिए आपके उत्तर केवल संबंधित परिच्छेद पर आधारित होने चाहिए ।

  • (परिच्छेद - 1) इसमें कोई संदेह नहीं कि राजनीतिक सिद्धांतकारों को अन्याय, जैसे कि अस्पृश्यता, के इतिहास को गंभीरता से लेना चाहिए । ऐतिहासिक अन्याय की अवधारणा में अनेक प्रकार के ऐतिहासिक अपकारों को विचार में लिया गया है, जो किसी न किसी रूप में वर्तमान में भी हो रहे हैं, और उनकी प्रवृत्ति ही ऐसी है कि उनमें सुधार न हो पाए । सुधार न होने देने के पीछे दो कारण कहे जा सकते हैं । एक तो यह, कि केवल इतना ही नहीं कि अन्याय की जड़ें इतिहास में गहरी जमी हुई हैं, बल्कि अन्याय स्वयं भी शोषण की आर्थिक संरचनाओं, भेदभाव की विचारधाराओं और प्रतिनिधित्व की रीतियों को संरचित करता है । दूसरा यह, कि ऐतिहासिक अन्याय की कोटि आम तौर पर बहुत से अपकारों, जैसे कि आर्थिक वंचन, सामाजिक भेदभाव और मान्यता के अभाव, के आर-पार फैली होती है । यह कोटि जटिल होती है, केवल इसलिए नहीं कि इसमें बहुत से अपकारों के बीच कोई स्पष्ट सीमा-रेखा नहीं होती, बल्कि इसलिए कि किसी न किसी अपकार की, आम तौर पर भेदभाव की, प्रवृत्ति दूसरे अपकारों से आंशिक रूप में स्वायत्तता हासिल कर लेने की होती है । यह भारत में सुधार के इतिहास से सिद्ध हुआ है ।
  • (1) इस परिच्छेद से कौन-सा मुख्य विचार अनुगत होता है ?
  • (a) भारत में अस्पृश्यता को राजनीतिक सिद्धांतकारों ने गंभीरता से नहीं लिया है ।
  • (b) ऐतिहासिक अन्याय किसी भी समाज में अपरिहार्य है और सुधार से सदैव परे है ।
  • (c) सामाजिक भेदभाव और वंचन की जड़ें दोषपूर्ण अर्थव्यवस्थाओं में हैं ।
  • (d) ऐतिहासिक अन्याय की प्रत्येक अभिव्यक्ति का सुधार करना, यदि असंभव नहीं, तो कठिन अवश्य है ।

Q2. उपर्युक्त परिच्छेद के आधार पर निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :

  • (1) आर्थिक भेदभाव मिटा देने से सामाजिक भेदभाव मिटता है ।
  • (2) लोकतांत्रिक राज्यव्यवस्था ऐतिहासिक अपकारों के सुधार का सबसे अच्छा मार्ग है ।
  • (a) केवल 1
  • (b) केवल 2
  • (c) 1 और 2 दोनों
  • (d) न तो 1, और न ही 2

Q3. शिक्षा जीवन में बदलाव लाने की भूमिका निभाती है, खास कर इस तेजी से बदलते और वैश्वीकरण को तेज गति वाले विश्व में । विश्वविद्यालय बौद्धिक पूँजी के अभिरक्षक और संस्कृति तथा विशेषज्ञतापूर्ण ज्ञान के प्रवर्तक हैं । संस्कृति, चिंतन की क्रियाशीलता, और सौंदर्य तथा मानवीय भावनाओं की ग्रहणशीलता होती है । केवल बहुत सी जानकारियों से युक्त व्यक्ति ईश्वर की धरती पर सिर्फ एक उबाऊ इंसान भर है । हमारा लक्ष्य यह होना चाहिए कि ऐसे व्यक्ति तैयार किए जाएँ जिनके पास विशेषज्ञतापूर्ण ज्ञान, दोनों हो । उनका विशेषज्ञतापूर्ण ज्ञान उन्हें आगे बढ़ने के लिए एक मज़बूत आधार प्रदान करेगा और उनकी संस्कृति उन्हें दर्शन की गहराइयों और कला की ऊँचाइयों तक ले जाएगी । साथ मिल कर यह मानवीय अस्तित्व को अर्थ प्रदान करेगा ।

  • (1) सुशिक्षित व्यक्तियों से रहित समाज आधुनिक समाज में रूपांतरित नहीं हो सकता ।
  • (2) संस्कृति अर्जित किए बिना, किसी भी व्यक्ति की शिक्षा पूर्ण नहीं होती ।
  • (a) केवल 1
  • (b) केवल 2
  • (c) 1 और 2 दोनों
  • (d) न तो 1, और न ही 2

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Frequently asked questions

What is the name of the exam?

The exam is the Civil Services (Preliminary) Examination.

Which paper is this question paper for?

This is for General Studies Paper-II.

What is the conducting body?

The conducting body is UPSC (Union Public Service Commission).

What is the year of this examination paper?

The year is 2019.

What is the maximum marks for this paper?

The maximum marks are 200.

What is the time duration allowed for this paper?

The time allowed is two hours.

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